भोजपुरी हो भाषा बा, जे मुख्य रूप से उत्तर भारत में, खासकर बिहार तथा उत्तर प्रदेश में बोली जाले। इहाँ के लोग के माँय भाषा के रूप में इ इस्तेमाल होला। भोजपुरी भाषा के अपना इतिहास बा, जे प्राचीन समय से चले आवे। ई हिंदी भाषा से संबंधित बा। भोजपुरी में अनगिनत फ़िल्में, गाना तथा साहित्य रचना भी भइल बा, जहाँ यहाँ के संस्कृति और परंपरा के नजर मिलेला। वन भोजपुरी अब तेज़ी से वैश्विक स्तर पर भी पहचान पावे लागल बा।
भोजपुरी के जनगीत
भोजपुरी भाषा के लोकगीत एक अनूठा महसूस होते। ये गीत, पीढ़ियों से मुख विधि से चले आ रहे हैं, और ये ग्राम्य जीवन, प्रेम, विराग और सामाजिक घटनाओं को उजागर करते हैं। अनेक बार इनमें रोजमर्रा के लोगों की कहानियाँ छुपी हुई होती हैं, जो मन को छू लेने वाली होती हैं। वर्तमान में, ये गीत भोजपुरी परंपरा का अहम भाग हैं, और इनका गवाह देना एक सुहावना अनुभव होता है।बहुत से कलाकार इन गीतों को जीवंत रख रहे हैं।
भोजपुरी व्याकरण
भोजपुरी बोलन के व्याकरण एक महत्वपूर्ण विषय भवता। ये व्याकरण मुख्य रूप से हिंदी के प्रभावित होखल, लेकिन में भोजपुरी में कुछ खास परयय उपलब्ध। जहाँ भोजपुरी के व्याकरण के नियम समझल आवश्यक भवता, खातिर सही बात बोल पाई। एने प्रकार से भोजपुरी के समीक्षा के क्षेत्र निरंतर बदल रहल ह, और नवा शोध से देहाती के शब्द में वृद्धि हो सकेले।
भोजपुरी सिनेमा: शुरुआत आ विकास
भोजपुरी चलचित्र में एक अनोखा स्थान है है। इसकी शुरुआत साठ के दशक में थी, लेकिन काफी अवधि के बाद यह अपनी पहचान स्थापित पाया। प्रारंभिक चलचित्र मुख्यतः सामाजिक मुद्दों पर लगाई जाती थी, परन्तु पश्चात्|जैसे समय गया, मुर्दाबाद और कॉमेडी फिर श्रोता की उम्मीद के संगत परिवर्तन। आज भोजपुरी सिनेमा सिर्फ नहीं भारत स्तर पर पर समुदाय में भी प्रसिद्ध गया हैं।
भोजपुरी बोली: क्षेत्र एवं विशेषता
भोजपुरी भाखा मुख्य रूप से उत्तर हिंदुस्तान के विभिन्न इलाकों में बोली जाने वाली है, खासकर बिहार और मध्य प्रदेश के अधिकतर अंशों में। इसकी विशेषता यह रहे है कि यहना हिंदी और मैथिली भाषाओं से प्रभावित रही है, और इसमें इनकाके शब्दावली का काफ़ी उपयोग होता आए। कई लोग इसकी संवाद के बरै प्रयोग करेन हैं, और यह बढ़-बढ़ के अपनाके पहचान बनावे है।
भोजपुरी साहित्य: पूर्व आ आज
भोजपुरी भाषा के पूर्व देखे खातिर, इहाँ एगो महत्वपूर्ण सवाल उठता है – इ कवन रूप में विकसित भइल बा। भोजपुरी क्षेत्र में, इ अधिकार के एगो कीमती रूप हवे। आ अब, आधुनिक दौर में, भोजपुरी बोली नईले विधा के साथ-साथ, भौतिक रूप के भी संरक्षित राखे के चुनौती के सामना रहत बा। हालांकि कुछ लोग more info सोचत हईं कि भोजपुरी भाषा एगो प्रमुख रूप लभल बा, बाकी लोग निरंतर प्रयास रहन देलें ताकि इ स्वयं स्वरूप बरकरार रखे। भोजपुरी साहित्य के भविष्य रचनात्मक चिंतन के साथ जुड़ल बा।